Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 88, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 88, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 88 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
होने से असर्वात्मक भी है, तत्स्वरूप होकर ये मुनि अवस्थित थे