Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 89, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
यद्विचित्रं क्रियाजालं दृश्यते गम्यते पुनः ।
राम वस्तुस्वभावोऽसौ न तदात्मविदां मतम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामते, इस निर्मल दृष्टि का
अवलम्बन कर उत्कृष्ट ज्ञान को प्राप्त करो, क्योकि ज्ञान से ही मुक्ति प्राप्त की जाती है