Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 89, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 89, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 89 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
नात्मज्ञस्यैष विषय आत्मज्ञो ह्यात्मवान्स्वयम् ।
आत्मनात्मनि संतृप्तो नाविद्यामनुधावति ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञान से समस्त
आशाओं का चारों ओर से खण्डन कर महामुनि वीतहव्य अपने चित्तरूपी पर्वत को निःशेषरूप से
खण्डन कर अवस्थित थे