Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 90, Verse 64
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 90, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 90 · श्लोक 64
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हिन्दी अर्थ
अब योगियों की स्वतन्त्रता का ही उपपादन करते हैं।
हे श्रीरामजी, दैव (पूर्व के अनुष्ठित कर्मो का फल देनेवाले ईश्वर), कर्मो की प्रधानतावाद में
प्रतिपादित प्राक्तन या वर्तमान कर्म ओर वासना ये सब उन योगियों के चित्त को, जो अवशिष्ट प्रारब्ध
कर्मो का उपभोग करने के लिए प्रवृत्त है, अन्यथारूप से प्रवृत्त करने में समर्थ नहीं हैं