Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 63
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हिन्दी अर्थ
अब दूसरे बीज का निर्वचन करते है ।
हे श्रीरामजी, वासना ओर प्राणस्पन्दन इन दोनों का संवेद्य यानी प्रिय ओर अप्रिय शब्द आदि
विषय बीज है, क्योकि उन्हीं से वे दोनों प्रस्फुरित होते हैं