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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 64

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 64 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 64

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

हृदय में प्रिय ओर अप्रिय शब्द आदि विषयों का स्मरण करके ही प्राणस्पन्द ओर वासना दोनों आविर्भूत होते हैं, इसलिए संवेद्य ही उन दोनों का बीज है