Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 65
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 65 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 65
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हिन्दी अर्थ
हे भद्र, जिस प्रकार मूल के उच्छेद से वृक्ष तत्काल नष्ट हो जाता है,उस
प्रकार संवेद्य का (प्रिय-अप्रिय विषय का) परित्याग करने से प्राणस्पन्दन और वासना दोनों ही
तत्काल समूल नष्ट हो जाते हैं