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Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 92, Verse 97

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 92, verse 97 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

उपशम प्रकरण · सर्ग 92 · श्लोक 97

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कब संवित्‌ को सम्यक्‌ ज्ञान होता है, इस पर कहते हैं। जब संवित्‌ कुछ विषय प्राप्त नहीं करती, जब साधारण चलन और असाधारण कम्पन नहीं करती एवं जब अपने स्वरूप में अवस्थान करती है, तब वह लिप्त नहीं होती