Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अन्धकारहरेणाशु विचारेण परं पदम् ।
दृश्यते विमलं वस्तु प्रदीपेनेव भास्वता ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महामुने, वासनाक्षय, आत्मविज्ञान और मनोनाश इन तीनों का एक साथ दीर्घकाल तक अभ्यास
जब किया जाता है, तब वे मननशील महात्मा के लिए फलप्रद होते हैं