Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
ज्ञानवान्बालकदलीस्तम्भपल्लवपालिषु ।
सुरगन्धर्वकन्याङ्गलतानन्दनकेलिषु ॥ ३० ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार पवन-स्पन्द के शान्त हो जाने पर
आकाश-तल में धूलि नहीं उडती, वैसे ही वासनारूपी धनसम्पत्ति का विनाश हो जाने पर लज्जावश
चित्त यत्र तत्र उड़ता नहीं है