Yoga Vasistha — Upashama Prakarana (Dissolution), Sarga 93, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के उपशम प्रकरण, सर्ग 93, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
उपशम प्रकरण · सर्ग 93 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
क्व कटप्रोच्चलद्भृङ्गमण्डलोत्पलशेखराः ।
मुग्धस्त्रीश्वासमधुरैर्मशकैर्मथिता गजाः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्तन, चिन्तनीय आदि जो पदार्थ हैं, उस सबकी सिद्धि सवित् के अधीन है यह दिखलाते है ।
हे श्रीरामजी, जो आप चिन्तन करते हैं, जाते हैं, स्थित रहते हैं ओर करते हैं वहाँ वहाँ स्थित
संवित् ही वह सब कुछ करती है, अतः चिन्तन, चिन्तनीय आदि सभी संवित्स्वरूप हैं, क्येकि सभी
का तत्त्व संवित् ही है, यह भाव है