Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 100, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 100, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 100 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
अन्यथैव च यो भावश्चेतसः पृथिवीपते ।
स एव नाशः कथितः स्वानुभूतश्च पण्डितैः ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
हे पृथिवीपते, चित्त का जो अन्यथाभाव है वही ब्रह्मस्वरूपहानि कही गयी हे, जो पण्डितो से
स्वानुभूत हे