Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 101, Verse 60
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 101, verse 60 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 60
संस्कृत श्लोक
शास्त्रसज्जनसंपर्कसंतताभ्यासयोगतः ।
कालेनामलतां याते चेतसीन्दाविवोदिता ॥ ६० ॥
हिन्दी अर्थ
वह कब उदित होती है, उसे कहते है।
शास्त्रों के निरन्तर अभ्यास के योग से तथा सज्जन पुरुषों के सम्पर्क से जैसे तिमिर दोष के
विनाश से नेत्र के निर्मल बन जानेपर नित्य सिद्ध ही चन्द्रैकता उदित होती है वैसे ही समय से चित्तके
निर्मल बन जाने पर यह चिति उदित होती हे