Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 101, Verse 61
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 101, verse 61 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 101 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
एतत्केवलमाभातं स्वानुभूतिभिराततम् ।
कथ्यते स्वानुभूतेषु स्वयं स्वं रूपमात्मना ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि आप इस चिति का वाणी से कथन करने मे समर्थ नहीं है तो फिर आप मेरे सदश लोगों से
कहते ही कैसे हैं, इस पर कहते हैं।
जिन लोगों ने स्वयं अपने स्वरूप का अनुभव किया है उन लोगों से अपनी अनुभूतियों के द्वारा ही
एकमात्र प्रकाशित इस विस्तृत आत्मस्वरूप का अपने-आप लोकदुष्ट से वर्णन किया जाता है