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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 112, Verse 15

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 112, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 112 · श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । मिथ्यापुरुषबोधाय श्रृणु राघव शोभनाम् । इमामाख्यायिकां हासजननीं मदुदीरिताम् ॥ १५ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठ ने कहा : हे राघव, मिथ्यापुरुष को जानने के लिए यह सुन्दर आख्यायिका आप सुनिये, जो मेरे द्वारा कही जाती है ओर हास्यप्रद है