Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 112, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 112, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 112 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अस्ति कश्चिन्महाबाहो मायायन्त्रमयः पुमान् ।
बालपेलवधीमूढो गूढो मौर्ख्येण केवलम् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
हे महावाहो, कोई एक मायायन्त्र से भरा पुरुष था, वह केवल बालक
के सदृश कोमल बुद्धि से विक्षिप्त ओर अज्ञान से आवृत था