Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 12, Verse 2
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 12, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 2
संस्कृत श्लोक
इति पूर्णधियो धीराः समनीरागचेतसः ।
न निन्दन्ति न नन्दन्ति जीवितं मरणं तथा ॥ २ ॥
हिन्दी अर्थ
बाहर से जिनकी बुद्धि पूर्ण है अर्थात्
जिन्होंने त्वंपदार्थं का शोधन कर लिया है, अतएव बाहर एवं भीतर से सम ओर रागशून्य चित्तवाले
तत्त्वज्ञ जीवन्मुक्त अपने जीवन एवं मरण की न स्तुति करते हैं ओर न निन्दा ही करते हैं