Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 120, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 120, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
एषा ज्ञानकला त्वन्तः सकृज्जाता दिने दिने ।
वृद्धिमेति बलादेव सुक्षेत्रव्युप्तशालिवत् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
किंतु यह जो
ज्ञानकला है, वह यदि भीतर एक वार उत्पन्न हो जाय, तो उर्वरा भूमि में वोये गये धान के सदृश
बलपूर्वक दिन पर दिन बढती ही जाती है, नष्ट नहीं होती