Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 126, Verse 101
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 126, verse 101 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 101
संस्कृत श्लोक
शिवं सर्वगतं शान्तं बोधात्मकमजं शुभम् ।
तदेकभावनं राम सर्वत्याग इति स्मृतः ।
भावयञ्छश्वदन्तः स्वं कार्यं कर्म समाचर ॥ १०१ ॥
हिन्दी अर्थ
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