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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 127, Verse 54

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 127, verse 54 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 127 · श्लोक 54

संस्कृत श्लोक

का कथा मर्त्यपिण्डानां निमेषान्तरवासिनाम् । अपि देवनिकाया ये तेऽपि दुष्कालगोचराः ॥ ५४ ॥

हिन्दी अर्थ

जो देवयोनि हैं वे भी जब दुष्ट काल के पिण्ड से छूटे हुए नहीं हैं यानी देवताओं को भी जब दुष्ट काल पचा जाता है, तब निमेषपर्यन्त रहनेवाले विनाशी शरीरो की तो कथा ही क्या