Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 4
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 4 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
सोऽहं कदाचिदास्थाने स्वर्गे तिष्ठञ्छतक्रतोः ।
श्रुतवान्नारदादिभ्यः कथां सुचिरजीविनाम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज इन्द्रदेव की सभा
में बैठे हुए मैंने किसी समय स्वर्गलोक में महर्षि नारदजी से अधिक दीर्घकाल तक जी रहे प्राणियों की
कथा सुनी थी