Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
कथाप्रसङ्गे कस्मिंश्चिदथ तत्राभ्युवाच ह ।
शातातपो नाम मुनिमौनी मानी महामतिः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
चिरंजीवियों की कथाओं मे किसी एक कथा के प्रसंग में मितभाषी, सम्माननीय
तथा निखिल शास्त्रों मे पारंगत विशाल बुद्धि महामुनि शातातप बोले