Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
मेरोरीशानकोणस्थे पद्मरागमये दिवि ।
अस्ति कल्पतरुः श्रीमाञ्छृङ्गे चूत इति श्रुतः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनि ने जो कुछ कहा, उसे बतलाते हैं।
मेरुपर्वत के ईशानकोण में स्थित पद्यरागमणि के सदृश चमकीले शिखर पर गगनचुम्बी एक
शोभायमान आम्र विशेष नामक प्रसिद्ध कल्पतरू वृक्ष है