Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 14, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 14, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तस्य कल्पतरोर्मूर्ध्नि दक्षिणस्कन्धकोटरे ।
कलधौतलताप्रोते विद्यते विहगालयः ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कल्पतरु के ऊपर सुवर्णं और
रजतमय कल्पलताओं से घने दाहिने तने के खोड़रे में एक घोंसला है