Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 10
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 10 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
नीरन्ध्रकलिकाजालं नीरन्ध्रमृदुपल्लवम् ।
नीरन्ध्रविकसत्पुष्पं नीरन्ध्रवनमालितम् ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
कलियां के समूहों से
वह भरा हुआ था, मृदु पल्लवं से भरा हुआ था, खिले हुए पुष्पों से परिपूर्ण था ओर वनमालाओं से भी
वेष्टित था