Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
सुरकिंनरगन्धर्वविद्याधरवरान्वितम् ।
जगज्जालमिवानन्तदशाशाकाशपूरकम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रष्ठदेव, किन्नर, गन्धर्वं एवं विद्याधरो से वह समन्वित था, ब्रह्माण्ड
की नाई विस्तृत ओर असीम दस दिशाओं तथा आकाश को व्याप्त किये था