Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
सर्वत्र कुसुमापूरैः सर्वत्र फलपल्लवैः ।
सर्वामोदरजःपुञ्जैः परं वैचित्र्यमागतम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी, चारों ओर फूलों की बाढ से सर्वत्र फल ओर पल्लवो से तथा सभी का दिल
बहला करनेवाले पुष्पपरागों के समूहों से अत्यन्त विचित्रता को प्राप्त हुए उस चूतनामक कल्पतरू को
मैंने देखा