Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तस्य कक्षेषु कुञ्जेषु लतापत्रेषु पर्वसु ।
पुष्पेष्वालयसंलीनान्विहगान्दृष्टवानहम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, तदनन्तर उपर्युक्त विशेषणो से युक्त उस वृक्ष के तने, शाखा
आदि की सन्धियों में, लता से आवृत शाखाग्रभागों में, लतापत्रो मे, पोरों या ग्रन्थयो में ओर पुष्पों में
घोंसले बनाकर उसमें स्थित हुए पक्षियों को मैंने देखा