Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
निशानाथकलाखण्डमृणालशकलैधितान् ।
अर्जुनाम्भोजिनीकन्दकवलान्ब्रह्मसारसान् ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
पक्षियों में विशेष बतलाते हैं।
श्रीरामजी, (वहाँ) मृणाल के टुकड़ों की नाई चंद्रमा की कला के खण्डों से वर्धित और शुभ्र
कमलिनीकन्दों को खानेवाले ब्रह्मदेव के वाहनभूत हंसपक्षी मैंने देखें