Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
विरंचेरथ हंसानां पोतकान्सामगायिनः ।
ॐकारवेदसुहृदो ब्रह्मविद्यानुशासनान् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
बाद में रहस्यभूत अर्थो
के पर्यालोचन में सहायक होने के कारण प्रणव और वेद के मित्रभूत ब्रह्मदेव के वाहन हंसों के बच्चे,
जो कि सामवेद का गान कर रहे थे एवं पर-अपर ब्रह्मविद्या का गुरुमुख से विधिवत् अध्ययन किये
हुए थे (मैंने देखें)