Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
प्रतिकल्पं च गणयन्खिन्नश्चक्रपरम्पराम् ।
जन्मनां लोकपालानां शर्वशक्रमरुत्वताम् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
वह प्रत्येक कल्प में ईशान, इन्द्र ओर अग्नि आदि
लोकपालों के जन्मों की चक्रपरम्परा को गिनता हुआ खिन्न होकर अवस्थित था