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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 32

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

संस्मर्ता समतीतानां सुरासुरमहीभृताम् । प्रसन्नगम्भीरमनाः पेशलः स्निग्धमुग्धवाक् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

चतुर तथा स्निग्ध एवं मुग्ध वाणीवाला था