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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

चन्द्रबिम्बसमाश्लेषद्विगुणाङ्गबृहत्फलम् । मूलसंलीनकल्पाभ्रद्विगुणीकृतपर्वकम् ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

अधिक ऊँचाई के कारण जनित चन्द्रबिम्ब के सम्बन्ध से मानों अूमत-रस की पूर्ति होने के कारण द्विगुणित अंगोंवाले बड़े-बड़े फल उसमें लगे थे, तनों के मूल भागों मेँ संलग्न कल्पभ्रमों से मानों द्विगुणित हुए उसके पोर थे