Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 15, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 15, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
सुरसंवलितस्कन्धं पत्रविश्रान्तकिन्नरम् ।
निकुञ्जकुञ्जजीमूतं कच्छसुप्तसुरादिकम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके तनों पर
देवताओं ने आश्रय किया था, पत्रों पर किन्नर विश्रान्ति ले रहे थे, उसके लताकुंजों मे मेघ समूह प्रविष्ट
हुए थे,जलप्राय कोटर-प्रदेश में देवता आदि सोये हुए थे