Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 16, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 16, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 16 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
भुशुण्ड उवाच ।
यत्पृच्छसि मुने सर्वं तदिदं वर्णयाम्यहम् ।
अनुद्वेगितया यत्नात्कथा श्राव्या महात्मना ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
भुशुण्ड ने कहा : हे मुने,
आप जो मुझसे पुछ रहे हैं, उस सबका मैं यह वर्णन (उत्तर) कर रहा हूँ। आप महानुभाव उद्विग्न
न होकर प्रयत्नपूर्वक कथा का श्रवण कीजिए