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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 17, Verse 1

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 17, verse 1 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 17 · श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । अथ राम भुशुण्डोऽसौ न प्रहृष्टो न वक्रधीः । सर्वाङ्गसुन्दरः श्यामः प्रावृषीव पयोधरः ॥ १ ॥

हिन्दी अर्थ

महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, तदनन्तर वह पक्षीराज भुशुण्ड वक्ष्यमाण रीति से कहने लगा। वह अभीष्ट लाभ सेन तो प्रसन्न होनेवाला था और न क्रूरमति था । वह सभी अंगों से सुन्दर ओर वर्षाकालीन मेघो के सदृश श्यामवर्णं था

सर्ग सन्दर्भ

सोलहवाँ सर्ग समाप्त सत्रहवाँ सर्ग जीवन्मुक्तो के उपयोगी गुणों से पूछे गये अर्थ का वर्णन कर पक्षियों का स्वामी भुशुण्ड पुनः उसी को सविस्तार कहने के लिए प्रवृत्त हुआ, यह वर्णन ।