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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 2

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 2 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

षट्पदश्रेणिनयना यस्योच्चस्तबकस्तनी । विलासिनी शरीरार्धे लता चूततरोरिव ॥ २ ॥

हिन्दी अर्थ

आम्रवृक्ष की नाई उनके देहार्धं में भ्रमर-पंक्तियों के सदृश नेत्रोवाली तथा उन्नत पुष्प-गुच्छों के सदुश स्तनधारिणी लता शोभित है