Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 3
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
हिमहारसिता यस्य लहरीस्तबकोम्भिता ।
आवेष्टितजटालूटा गङ्गाकुसुममालिका ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
उनके एक गंगारूपी
कुसुम - मालिका है, जो हिम और हार की नाई अत्यन्त धवल लहरीरूपी पुष्पों से गुम्फित (गूँथी गई)
है ओर जिसने जटाजूट को वेष्टित कर रक्खा हे