Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 18, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 18, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 18 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
धूलिलेखामहावर्तं स्वच्छपावकसंभवम् ।
परमाणुमयं भस्म यस्य ज्ञानजलं सितम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत के प्रलय में हेतुभूत अपने चक्षुरूपी स्वच्छ अग्नि से उत्पन्न हुई, धूलियों की पंक्तिरूप
बड़े-बड़े प्रलयकालीन झंझावातों की उत्पादक, परमाणुमय (स्थूल महाभूतो का सूक्ष्म-सूक्ष्म भूतों में
प्रवेश-क्रम से परम सूक्ष्म अव्यक्तमात्र का परिशेष होने के कारण परमाणुमय), अतिशुभ्र एवं
ज्ञानजलात्मक (उसके साक्षी चैतन्यस्वरूप जल से प्लावित होने के कारण ज्ञानजलात्मक) मायारूप
भस्म उन मायाशबल महादेवजी का भूषण हे