Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
एवं विपक्वगर्भास्ता नाभीकमलपल्लवे ।
सुवते स्म मृदून्यण्डान्यथ वल्ल्य इवाङ्कुरान् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
तदनन्तर उस प्रकार विचरण करती हुई उन राजहँसियों का गर्भ परिपक्व हो गया ।
उन्होने नाभिकमल के कोमल पल्लव मेँ उस प्रकार मुलायम अण्डे दिये, जिस प्रकार वल्लियाँ अंकुर
देती हैं