Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
तानि कालं समासाद्य ततोऽण्डान्येकविंशतिः ।
गर्भाक्रान्त्या द्विधा जग्मुर्ब्रह्माण्डानीव सारवत् ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्तर समय पाकर उन्होने इक्कीस अण्डे दिये ओर यथासमय भीतरी गर्भ पक जाने
पर हँसियों के पग के प्रहार द्वारा वे उस प्रकार द्विधा विभक्त हो गये, जिस प्रकार सारयुक्त ब्रह्माण्ड
सुवर्ण ओर चाँदी के खप्परो द्वारा द्विधा विभक्त हो जाता है