Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 17
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 17
संस्कृत श्लोक
अण्डेभ्यस्तेभ्य एवं हि जाता वयमिमे मुने ।
भ्रातरश्चण्डतनया वायसा एकविंशतिः ॥ १७ ॥
हिन्दी अर्थ
हे मुने, उस प्रकार उन अण्डो के द्वारा ये हम चण्ड के पुत्र इक्कीस भाई कौए की जाति में उत्पन्न
हुए