Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 19, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 19, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 19 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ते संजाता गता वृद्धिं तस्मिन्कमलपल्लवे ।
संजातपक्षाः संपन्ना गगनोड्डयने क्षमाः ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
उस कमल के पल्लव के ऊपर हुए वे हम क्रमशः बड़े हुए, हम लोगों को पंख आए ओर
आकाश में उड़ने में समर्थ भी हुए