Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 2, Verse 49
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 2, verse 49 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 2 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
प्राप्तप्राप्यो भवान्नाम सत्त्वभावमुपागतम् ।
चित्तं ज्ञानाग्निना दग्धं न भूयः परिरोहति ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामजी,
आप प्राप्तव्य वस्तु को प्राप्त कर चुके हैं, आपका अन्तःकरण सत्त्वरूपता को प्राप्त हुआ है ओर ज्ञानरूप
अग्नि से दग्ध हो चुका है, अतः फिर वह अंकुरित नहीं हो सकता