Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
इन्दोरथ करैः शीतैः पाषाणीकृतवारिभिः ।
आसन्नकरकापातैः कच्चित्तात न खिद्यसे ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
वायसराज, जल को
पाषाण के सदुश कठोर बना देनेवाले शीतल चन्द्रकिरणों ओर निकट प्रलय के लिए हो रहे पाषाण
के पतनों से क्या तुम्हें खेद नहीं होता ?