Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
आलोकिता लोकदशा दृष्टा दृष्टान्तदृष्टयः ।
नूनं संत्यक्तमस्माकं मनसा चञ्चलं वपुः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, हमने प्राणियों की जन्म, मरण आदि अनर्थ-दशाएँ देख लीं और
मिथ्यात्व-निर्णायक स्वप्न आदि दृष्टान्त-दृष्टियाँ भी देख ली तथा हमारे मनने अपना चंचल
स्वरूप भी सदा के लिए भली प्रकार त्याग दिया है