Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
अनारतनिजालोके नित्यं चापरितापिनि ।
कल्पागस्योपरि सदा वेद्मि कालकलागतिम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
कल्पवृक्ष के प्रभाव से ही कल्प-समाप्ति तक हम लोगों को खेद नहीं होता, यह कहते हैं।
निरन्तर शान्ति देनेवाले अविनाशी स्व-स्वरूप प्रकाश में स्थित होकर मैं इस कल्पवृक्ष के ऊपर
सदा काल की कलन गति जानता रहता हूँ