Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
अविज्ञातदिवारात्रौ ह्यस्मिन्नुच्चैः शिलोच्चये ।
जानामि निजया बुद्ध्या लोककालक्रमस्थितिम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
मुनिवर, दिन
और रात जाने बिना ही इस उन्नत शिखर पर अपनी बुद्धि से ही लोकों के कालक्रम की स्थिति
जानता रहता हूँ