Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 33
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 33 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 33
संस्कृत श्लोक
नोज्झामो न च गृह्णीमस्तिष्ठामो नेह च स्थिताः ।
मृदुपादा दृशा कूरा वयमस्मिन्द्रुमे स्थिताः ॥ ३३ ॥
हिन्दी अर्थ
महर्षे, इस वृक्ष पर उपस्थित हुए हम लोग प्राप्त
वस्तुओं का न परित्याग करते हैं, एवं न अप्राप्त वस्तु के ग्रहण की चेष्टा ही करते हैं; व्यवहार दृष्टि
से स्थित हैं एवं परमार्थदृष्टि से स्थित नहीं भी हैँ । हम लोग एकमात्र व्यवहार की सिद्धि के लिए,
कण्टकाकीर्ण भूमि की नाई, सावधानी से चलने के कारण कोमल पगवाले हैं और तत्त्वदृष्टि से संसार
का उच्छेदन कर देने के कारण क्रूर भी हैं