Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 20, Verse 34
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 20, verse 34 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 20 · श्लोक 34
संस्कृत श्लोक
वीतशोकभयायासैस्त्वादृशैः पुरुषोत्तमैः ।
तुष्टैरनुगृहीताः स्मः संस्थिता विगतामयाः ॥ ३४ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़े लोगों के अनुग्रह से भी हम लोगों को खेद-प्राप्ति नहीं होती, ऐसा कहते है।
शोक, भय ओर आयास से वर्जित आपके सदुश सन्तुष्ट उत्तम पुरुष हम लोगों पर सदा अनुग्रह
करते हैं, इसलिए भी हम लोग सदा दुःखों से निर्मुक्त होकर अवस्थित हैं